मैं क्या जानू मेरे रघुराई

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मैं क्या जानू मेरे रघुराई,

तू जाने मेरी किस में भलाई

सहारा तेरा, ओ साईं.....

सारे जगत को देने वाले,

मैं क्या तुझ को भेंट चढ़ाऊँ,

जिसके स्वांस से आए खुशबू,

उसको क्या में फूल चढ़ाऊँ,

अपरमपार है महिमा तेरी,

कोई ना जान पाए,

सहारा तेरा है ओ साई,

मैं क्या जानू मेरे रघुराई,

तू जाने मेरी किस में भलाई

सहारा तेरा, ओ साईं……..

सारे द्वारे छोड़ के भगवन,

आज मैं तेरे द्वारे आई

बाह पकड़ लो अब तो ठाकुर,

तो जानू तेरी ठकुराई

इस दुनिया की भीड़ भाड़ में,

तेरा ही आधार

सहारा तेरा है ओ साई,

मैं क्या जानू मेरे रघुराई,

तू जाने मेरी किस में भलाई

सहारा तेरा, ओ साईं…….

बाँह पसार के जिस को छू ले,

लोहा भी पारस हो जाता

तेरी शरण में जो भी आवे,

वो पापी पावन हो जाता

बीच भवर में नैया मेरी,

अब तो लगा दो पार

सहारा तेरा है ओ साई,

मैं क्या जानू मेरे रघुराई,

तू जाने मेरी किस में भलाई

सहारा तेरा, ओ साईं…..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।