रघुकुल नंदन मुक्ति बन्धन

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

रघुकुल नंदन मुक्ति बन्धन,

सत सत नमन करूँ अभिनंदन,

कौशल्या सुत श्री राम को,

न्यौछावर तन मन धन....

प्रगट भय जब दीनदयाला,

कौशल्या हियँ हर्ष भारी,

दसरथ कैकई सुमित्रा हर्षे,

अयोध्या भई पुलकित सारी,

विष्णु का अवतरण देखत,

हर्षे गौरी संग त्रिपुरारी,

नभचर किन्नर देवगण सब,

कीजे रामनवमी का वंदन….

बाल काल मे सर्व बिद्या,

राम गुरु वशिष्ठ से पाये,

सिया संग विवाह बंधन,

धनुष खण्डन से पाये,

पितुमात का मान रखके,

चौदह वर्ष बनवास आये,

रामन के संहार करके,

सिय का मुक्त किया बंधन …..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।