आज़मगढ़ सम्मान हमारा

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॥ पावन पाठ ॥

यह साधना की माटी है यह सर्जना की धरती है,

संघर्ष शहादत की महान मूर्ति है,

यहां एकता का कीर्तन है सद्भाव की आरती है,

यह पूजनीय यह साझा संस्कृति है,

मानवता ही धर्म यहां है जाति भाईचारा,

अमन प्रेम का चंदन सर माथे पर है धारा,

शान यही पहचान यही यही है अभिमान हमारा,

आजमगढ़ सम्मान हमारा, आजमगढ़ अभिमान हमारा......

सरयू कुंवर सिलनी घाघरा तमसा की है धार यहां,

31 हस्तलिखित गुरु ग्रंथ साहिब का दर्शन सार यहां,

चरण पादुका साहिब के चरणों की पावन धाम यहां,

चरण धरे प्रभु रामचंद्र जी किये कभी विश्राम यहां,

ज्ञानी ध्यानी ऋषियों मां अनुसूया जी का पलना है,

अत्रि चंद्रमा दत्तात्रेय दुर्वासा जी का अंगना है,

सत्य सनातन मूल्यों का यह कल-कल बहता झरना है,

अजान आरती और अरदास इस के तन का गहना है,

सन 57 के संग्राम की गूंज यहां,

पलना भैरव और हरिहर की तान यहां,

शान यही पहचान यही यही है अभिमान हमारा,

आजमगढ़ सम्मान हमारा आजमगढ़ अभिमान हमारा......

सांकृत्यायन अल्लामा शिब्ली चंद्रबली की दृष्टि है,

गीत गजल साहित्य लेखकों और कवियों की सृष्टि है,

विश्वनाथ हरिऔध सोहेल कहती बिरही लक्ष्मी की,

सामाजिक अनुभूति इनकी और विचारों की शक्ति है,

ब्लैक पॉटरी और मुबारकपुर की साड़ियां शान कहें,

जय जवान और जय किसान का नारा यहां परवान चढ़े,

तन मन धन न्योछावर ईस पर जीवन इसके नाम करें,

स्वर्ग से सुंदर जिला हो अपना मिलकर ऐसा काम करें,

सेवाभावी परिवर्तन उपदेश हमारा,

एक आंगन हम एक कुटुंब संदेश हमारा,

शान यही पहचान यही यही है अभिमान हमारा,

आजमगढ़ सम्मान हमारा आजमगढ़ अभिमान हमारा......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।