ये सब मन का खेल बाँवरे

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॥ पावन पाठ ॥

ये सब मन का खेल बाँवरे, ये सब मन का खेल.....

मन में प्रेम की लहर उठे तो उड़े हवा में चाँद को छू ले,

मन में क्रोध की अगन उठे तो मर्यादा और मान ये भूले,

मर्यादा और मान ये भूले, ये सब मन का खेल बावरे......

मन बुझ जाए तो हो जाता दीन हीन मानव बेचारा,

मन में जोश उमंग उठे तो मोड़ दे ये तो वक्त की धारा,

मोड़ दे ये तो वक्त की धारा, ये सब मन का खेल बावरे.....

मन को तू पहचान, मन ही बैरी, मन ही मीत है बंदे,

मन के हारे, हार जगत में, मन के जीते जीत है बंदे,

मन के जीते, जीत है बंदे, ये सब मन का खेल बावरे......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।