तेरे चरणों का मैं प्रेमी हूँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे चरणों का मै प्रेमी हूँ,

एक नज़र करदे,

गीत में भाव हो भक्ति हो,

वो असर भर दे.....

हीरे मोती मनी माणिक न हमें चहिये,

आलीशान बगले,

ये नो महले भी नही चहिये,

कण्ठ को गीतों की सरगम से,

तर बतर करदे,

गीत में भाव हो भक्ति हो,

वो असर भर दे.....

मात हंसाशिनी तू हमे झलक दे दे,

तुझको पाने की मेरे मन मे,

एक ललक दे दे,

मेरा ये गीत समर्पित है माँ,

अमर करदे,

गीत में भाव हो भक्ति हो,

वो असर भर दे....

ताल हो राग हो स्वर हो सुरीले,

गीतों में,

तेरा आव्हान हो गुणगान हो,

मा गीतों में,

साधना पूरी हो "राजेन्द्र" को ये,

वर दे दे,

गीत में भाव हो भक्ति हो,

वो असर भर दे....

गीतकार /गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।