जय जय जय कृष्णा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( हे कान्ह तारी मुरली ये,

मोही ने गरबो घेलों किधो,

आवे सरमर साधिनी ने रे मा चरमर नी रात नी,

हीरे वोहो होलड़ी का रे वागी । )

राधे राधे राधे राधे,

राधे राधे राधे,

राधे राधे राधे राधे,

राधे राधे राधे....

कृष्णा नाम लिखा है, मेरे कण कण में,

कृष्णा नाम बसा है, मेरे जीवन में,

मैं ढूंढ रही थी कृष्णा को जग ब्रह्माण्ड में,

मैं ढूंढ रही थी कृष्णा को जग ब्रह्माण्ड में,

मगर कृष्णा मिले मुझको मेरे ही मन में,

मगर कृष्णा मिले मुझको मेरे ही मन में,

जय जय जय जय जय कृष्णा,

राधा रमन नटवर कृष्णा,

जय जय जय जय जय कृष्णा.....

श्याम रंग तेरा रूप है श्याम, रंग रंगरूप,

हरी हरी कृष्णा का, मैं रंग हरा लेलूं,

तू नन्दलाल तो लाल ही रंग तेरा है ना,

हाँ तू नन्दलाल तो लाल ही रंग तेरा है ना,

जो रंग तुझको भाये मैं वो ही चुनर डालूं,

मैं ढूंढ रही थी नटरंग को, इंद्रधनुष के रंग में,

मैं ढूंढ रही थी नटरंग को, इंद्रधनुष के रंग में,

मगर कृष्णा मिले मुझको मेरे ही मनरंग में,

मगर कृष्णा मिले मुझको मेरे ही मनरंग में,

कृष्णा नाम लिखा है मेरे कण कण में,

कृष्णा नाम बसा है मेरे जीवन में,

मैं ढूंढ रही थी कृष्णा को जग ब्रह्माण्ड में,

मैं ढूंढ रही थी कृष्णा को जग ब्रह्माण्ड में,

मगर कृष्णा मिले मुझको मेरे ही मन में,

मगर कृष्णा मिले मुझको मेरे ही मन में,

जय जय जय जय जय कृष्णा,

राधा रमन नटवर कृष्णा,

जय जय जय जय जय कृष्णा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।