मोहन को चंदा दिखा रही मां

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोहन को चंदा दिखा रही मां,

नहीं माने कन्हैया मनाये रही मां....

आसमान का वो चंदा माम

देखो मचाल गए द घनश्याम,

अपने मोहन को बहलाये रही माँ,

फुशलाये रही मां,

नहीं माने कन्हैया मनाये रही मां,

मोहन को चंदा दिखा रही मां.....

किया इशारा नंद जी गायनी,

लायी माँ थाली में पानी,

उसमे परछायी दिखलाये मान,

नहीं माने कन्हैया मनाये रही मां,

मोहन को चंदा दिखा रही मां.....

मोहन पानी में ख़ूब खेले,

देव लोक से देवता बोले,

देखो देखो मुस्काये रही मां,

नहीं माने कन्हैया मनाये रही मां,

मोहन को चंदा दिखा रही मां.....

खेल खेल के मोहन थक गए,

तब मां के आंचल में छुप गए,

गागा के गागा के लोरी सुना रही मां,

बहलाये रही माँ

नहीं माने कन्हैया मनाये रही मां,

मोहन को चंदा दिखा रही मां.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।