माई शेरावाली हई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नवमी मे माईया के स्वागत कर,

हाथ दुनो जोड़ गोड़ लागत कर,

तू सजाई ल ना पूजावा के थाली हाली,

कही कहाली देवी दुर्गा कही कहाली ईं काली,

माई शेरावाली हई..माई शेरावाली हई,

कस्ट के सारा नष्ट करेली भरेली झोली खाली माई शेरावाली हई….

इहे पार्वती सती शारदा भवानी,

नव नव रूप मे रहेली महारानी,

काश्मीर मे ऊँचे पहाड़ प वैष्णो माई पूजाली…माई शेरावाली हई….

लाले चुनरिया लाले झंडा लहराला,

माइया निराली बाटे महिमा निराला,

नीलकमल आशु के हरदम करस ईहे रखवाली…माई शेरावाली हई,

कष्ट के सारा नष्ट करेली भरेली झोली खाली माई शेरावाली हई……

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।