जरा पालकी सजा दो गजानंद जा रहे हैं

पारंपरिक
श्री गणेश आरती गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

जरा पालकी सजा दो गजानंद जा रहे हैं,

खुशियां लुटा के सबको निजधाम जा रहे हैं....

तेरी ज्योत में जगाऊं और आरती उतारु,

नैनों में नीर भरके छवि दिल में बसा रहे हैं,

जरा पालकी सजा दो.....

तेरे मस्तक तिलक लगाऊं श्रंगार सब कराऊ,

लड्डुओं का भोग लगाकर डोली में बिठा रहे हैं,

जरा पालकी सजा दो.....

कोई ढोल नगाड़े बजाए कोई तालियां बजाए,

भक्तों की भीड़ भारी जयकारे लगा रहे हैं,

जरा पालकी सजा दो.....

खुशियों का भर खजाना गजानंद जल्दी आना,

तेरी आस में यह जीवन यूं ही बता रहे हैं,

जरा पालकी सजा दो.....

तुम दाता हम पुजारी तुम राजा हम भिखारी,

रो रो के दिल पुकारे गजानंद जा रहे हैं,

जरा पालकी सजा दो.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।