धोखा दे गई जवानी

पारंपरिक
अन्य भजन विविध भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

ऐसो बुढ़ापा आयो रे दगा दे गई जवानी,

दे गई जवानी धोखा दे गई जवानी,

ऐसा बुढ़ापा आया रे दगा दे गई जवानी....

पहला बुढ़ापा मेरे बालों पर आया,

बालों पर आया सखी जुल्फों पर आया,

मेहंदी ने लाज बचाई रे दगा दे गई जवानी,

ऐसा बुढ़ापा आया रे.....

दूजा बुढ़ापा मेरे नैनों पर आया,

नैनो पर आया मेरी अंखियों पर आया,

चश्मे ने लाज बचाई रे दगा दे गई जवानी,

ऐसा बुढ़ापा आया रे.....

तीजा बुढ़ापा मेरे दांतो पर आया,

दांतो पर आया मेरी जीभया पर आया,

हलवा ने लाज बचाई रे दगा दे गई जवानी,

ऐसा बुढ़ापा आया रे.....

चौथा बुढ़ापा मेरे चेहरे पर आया,

चेहरे पर आया मेरे मुखड़े पर आया,

फेशियल ने लाज बचाई रे दगा दे गई जवानी,

ऐसा बुढ़ापा आया रे.....

पांचवा बुढ़ापा मेरे घुटनों पर आया,

घुटनों पर आया मेरे पैरों पर आया,

लटिया ने लाज बचाई रे दगा दे गई जवानी,

ऐसा बुढ़ापा आया रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।