नौमी ने मैंने नेम किया था

पारंपरिक
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

नौमी ने मैंने नेम किया था,

तो दसवीं में एक टाइम खाया हो राम,

ग्यारस तो मैंने करिए निर्जला तो,

द्वादशी ने भोजन बनाया हो राम,

पहले तो मैंने चावल राधे दूजा तो दाल बनाई हो राम,

पहले तो मैंने बामन जमाई दूजे में सासु ससुरा हो राम,

पहले परोसे में सासु और ससुरा,

दूजे में जेठ जेठानी हो राम,

तीजे परोसे में ननंद और नंदोई,

चौथे में देवर दौरानी हो राम,

पांचवे परोसे में बहू और बेटा,

छठे में संघ की सहेली हो राम,

सातवे परोसे में पति परमेश्वर,

मैं जोड़े से भोजन खाऊं हो राम,

हरि जी के घर से आई रे पलंगिया,

इसमें कौन-कौन जावे हो राम,

पहली पलंगिया में सासु और ससुरा,

दूजे में जेठ जेठानी हो राम,

तीजी पलंगिया में ननंद और नंदोई,

मैं धर्म कमाती जाऊंगी राम,

चौथी पलंगिया में धी और जमाई,

मैं लाड लड़ाती जाऊंगी राम,

पांचवी पलंगिया में बहू और बेटा,

मैं इनसे नाम चलाऊंगी राम,

छठी पलंगिया में संग की सहेली,

मैं हंस बतलाती जाऊंगी राम,

सातवीं पलंगिया में पति परमेश्वर,

मैं जोड़े से स्वर्ग सिधारूंगी राम,

हरि जी मेरा लेखा-जोखा मांगे,

क्या क्या धर्म बाई करिया हो राम,

तुमने बताए राम जी वही कराए,

और तो कछु नहीं कीना हो राम,

झूठ नहीं बोली घट नहीं तोली,

यूं ही धर्म हरजी कीना हो राम,

झूठ नहीं बोली बहनों घट नहीं तोली,

यूं ही धर्म काम आवे हो राम,

जिन या ग्यारस गाय सुनाई,

वही परम पद पामें हो राम,

बाली गावे घर वर पावे,

तिरिया पुत्र खिलावे हो राम,

बुढ़िया गावे गंगा जी में नहावे,

स्वर्ग में झोटे खावे हो राम।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।