ऐसे कपटी श्याम कुंज वन बन छोड़ गए

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ऐसे कपटी श्याम कुंज वन बन छोड़ गए ऊधो....

जो मैं होती जल की मछलियां,

मेरे प्रभु करें स्नान चरण छू लेती रे उधो,

ऐसे कपटी श्याम कुंज वन बन छोड़ गए ऊधो....

जो मैं होती बागो की कलियां,

मेरे प्रभु करे पूजा-पाठ चरणों में रहती रे उधो,

ऐसे कपटी श्याम कुंज वन बन छोड़ गए ऊधो....

जो मैं होती चंदन चंदनिया,

मेरे प्रभु लगामें तिलक माथे पर सजती रे उधो,

ऐसे कपटी श्याम कुंज वन बन छोड़ गए ऊधो....

जो मैं होती जंगल की हिरनी,

मेरे प्रभु चलामें बाण प्राण तेज देती है उधो,

ऐसे कपटी श्याम कुंज वन बन छोड़ गए ऊधो....

जो मैं होती काली नागिनीया,

मेरे प्रभु बजामें बीन लहर लहर आती है उधो,

ऐसे कपटी श्याम कुंज वन बन छोड़ गए ऊधो....

जो मैं होती तुलसी का बिरला,

मेरे प्रभु लगामें भोग थाली विच रहती है उधो,

ऐसे कपटी श्याम कुंज वन बन छोड़ गए ऊधो....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।