तुम्हारी ही कमी है साँवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज--- अगर दिलबर की रुसवाई

सजाये बैठे है मेहफिल,

हो रही शाम आ जाओ,

तुम्हारी ही कमी है साँवरे

घनश्याम आजाओ...

हजारों कोशिशें मैने कि,

तुमको बुलाने की,

कभी रोकर कभी गा कर,

ब्यथा अपनी सुनाने की,

मगर अब तक हरेक कोशिश हुई नाकाम,

आजाओ,

तुम्हारी ही कमी है साँवरे....

हमारे दिल की चाहत को,

जरा भी तुम ना सुनते हो,

बहुत देरी हुई क्यूँ कर नही,

फरियाद सुनते हो,

अगर रूठे हुए हो तो करु क्या,

कुछ तो बतलाओ,

तुम्हारी ही कमी है साँवरे....

सभी साथी और संबंधी,

तेरे स्वागत में आये है,

अकेला मैं नही प्यासा,

सभी पलकें बिछाये है,

तड़प सुनलो दिलों की दिल के ओ,

दिलदार आ जाओ,

तुम्हारी ही कमी है साँवरे....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।