मोरे अंगना पधारो हे गजानन

पारंपरिक
श्री गणेश आरती गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

मोरे अंगना पधारो हे गजानन,

जोड कर और तेरे पखारू चरण,

मोरे अंगना पधारो हे गजानन….

सज गयी सारी गलिया,

सज गये सब नगर,

अपनी पलकों से हमने,

सजायी डगर,

राह तेरी निहारे है पल पल नयन,

मोरे अंगना पधारो हे गजानन,

जोड कर और तेरे पखारू चरण,

मोरे अंगना पधारो हे गजानन…….

आरती तेरे गुण टेर गायेंगे हम,

और चन्दन का टिका लगायेंगे हम,

तोरे गंगा के जल से धुलाये चरण,

मोरे अंगना पधारो हे गजानन,

जोड कर और तेरे पखारू चरण,

मोरे अंगना पधारो हे गजानन…….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।