मोरी चूनरी में लग गयो दाग पिया

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॥ पावन पाठ ॥

मोरी चुनरी में लग गयो दाग पिया.....

पाँच तत्त्व की बनी चुनरिया,

सोरह सै बँद लागे जिया,

मोरी चुनरी में लग गयो दाग पिया.....

यह चुनरी मोरे मैके तें आई,

ससुरे में मनुवा खोय दिया,

मोरी चुनरी में लग गयो दाग पिया.....

मलि-मलि धोई दाग न छूटे,

ज्ञान को साबुन लाय पिया,

मोरी चुनरी में लग गयो दाग पिया.....

कहै कबीर दाग तब छुटिहैं,

जब साहेब अपनाय लिया,

मोरी चुनरी में लग गयो दाग पिया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।