प्रभु अपने दर से अब तो ना टालो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रभु अपने दर से, अब तो ना टालो,

गिरा जा रहा हूँ, उठा लो उठा लो.....

खाली ना जाता कोई दर से तुम्हारे,

द्वारे खड़ा हूँ नन्ही बाहें पसारे,

चरणों की सेवा में, लगा लो लगा लो,

गिरा जा रहा हूँ, उठा लो उठा लो,

प्रभु अपने दर से, अब तो ना टालों,

गिरा जा रहा हूँ, उठा लो उठा लो ,

प्रभु अपने दर से.....

नहीं टूट पायेगा, दुनियाँ का बंधन,

जब तक कृपा ना होगी तेरी रघुनंदन,

कदम लड़खड़ाए हैं, संभालो संभालो

गिरा जा रहा हूँ, उठा लो उठा लो,

प्रभु अपने दर से, अब तो ना टालों,

गिरा जा रहा हूँ, उठा लो उठा लो ,

प्रभु अपने दर से.....

अगर था हटाना तो फिर क्यों बुलाया,

सोते ही रहने देते काहे जगाया,

अब जब जगाया तो अपना बना लो,

गिरा जा रहा हूँ, उठा लो उठा लो,

प्रभु अपने दर से, अब तो ना टालों,

गिरा जा रहा हूँ, उठा लो उठा लो ,

प्रभु अपने दर से.....

बंधन प्रताप सारे टूट चुके हैं,

जितने सहारे थे छूट चुके हैं,

अवसर मिला है अपना वादा निभा लो,

गिरा जा रहा हूँ, उठा लो उठा लो,

प्रभु अपने दर से, अब तो ना टालों,

गिरा जा रहा हूँ, उठा लो उठा लो ,

प्रभु अपने दर से.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।