जय पारस देवा

पारंपरिक
अन्य भजन जैन भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

अर्हम,

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

1

श्रीमज जिनेन्द्र,स्याद्दवाद नायक,तीर्थंकराय, दिगंबराय 2

त्रिलोक्य व्याप्तम,त्रिकालदर्शी,त्रिलोक्य लोचन,स्वयंभुवाय,2

अर्हम,

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

2

हे वीतरागी,पञ्च परमेष्ठी, मेरु प्रतिष्ठे,सम्यक प्रणम्य,

सौधर्म इन्द्र,कर जोड़ी हाथम, तुभ्यम नमामी, हे पार्श्व नाथम

अर्हम,

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

3

रत्नस्य वृष्टि,करी षष्ठ मासे, कुबेर हर्षित,तुभ्यं नमामी 2

वाराणसी,अधि,पति हे देवम,गर्भस्य वामा, मां उर,तिष्ठे, 2

अर्हम,

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

4

अनन्तदर्शी,अनन्तवीर्या,अनन्तचतुष्टय हो तुम जिनेश्वर 2

पादौ पदानी,जिनेन्द्र धत्ते,पद्मानी तत्रे,विबुधा रच्यांती 2

अर्हम,

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

5

चिंतामणि त्वं,ज्योतिस्वरूपी,निराकार हे, निरंजनाय, 2

त्रिलोक्य मंगल,दिव्य ध्वनि त्वं, मुख्स्य उचरे, हे पार्श्व नाथम 2

अर्हम,

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

6

त्वं कल्पवृक्षम, त्वं कामधेनु,विषहर, विनाशम,उवसग्गहारम 2

धरनेंद्र पद्मा, नागेंद्र पूजित, जिनेन्द्र देवम, हे पार्श्व नाथम 2

अर्हम,

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

वन्दो (वन्दो)

वन्दो (वन्दो)

जय पारस देवा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।