मेरे बांके बिहारी सांवरिया तेरा जलवा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

है इधर तू ही तू, है उधर तू ही तू,

जिधर देखता हूं उधर तू ही तू,

मेरे बांके बिहारी सांवरिया,

तेरा जलवा कहां पर नहीं है,

तेरा जलवा कहां पर नहीं है,

मेरे बांके बिहारी सांवरिया.....

आंखों वालों ने तुझको है देखा,

कान वालों ने तुझको सुना है,

तेरा दर्शन,,, उन्हीं को हुआ है,

जिनकी आंखों में पर्दा नहीं है,

मेरे बांके बिहारी सांवरिया....

लोग पीते हैं पी पी के गिरते,

हम पीते हैं गिरते नहीं हैं,

( जाम पर जाम पीने से क्या फायदा,

सुबह को पी शाम को उतर जाएगी,

मेरे नटवर की नैनो से पी के देख,

जिंदगी तेरी संवर जाएगी। )

लोग पीते हैं पी पी के गिरते,

हम पीते हैं गिरते नहीं है,

हम तो पीते हैं सत्संग का प्याला,

कोई अंगूरी मदिरा नहीं है,

मेरे बांके बिहारी सांवरिया....

यह नशा जल्दी चढ़ता नहीं है,

चढ़ जाए तो उतरता नहीं है,

लोग पीते हैं दुनिया के डर से,

हमको दुनिया की परवाह नहीं है,

मेरे बांके बिहारी सांवरिया,

तेरा जलवा कहां पर नहीं हैं....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।