पिंजरे के पंछी रे, तेरा दर्द ना जाणे कोए,

पारंपरिक
अन्य कथा विविध भजन katha
॥ पावन पाठ ॥

पिंजरे के पंछी रे,

तेरा दर्द ना जाणे कोए,

तेरा दर्द ना जाणे कोए ॥

कह ना सके तू,

अपनी कहानी,

तेरी भी पंछी,

क्या जिंदगानी रे,

विधि ने तेरी कथा लिखी है,

आँसू में कलम डुबोय,

तेरा दर्द ना जाणे कोए ॥

चुपके चुपके,

रोने वाले,

छुपाके रखना,

दिल के छाले रे,

ये पत्थर का देश हैं पगले,

यहाँ कोई ना तेरा होय,

तेरा दर्द ना जाणे कोए ॥

पिंजरे के पंछी रे,

तेरा दर्द ना जाणे कोए,

तेरा दर्द ना जाणे कोए ॥

" मंजीत सिंह "

पैड प्लेयर= 9887203444

फ्रॉम =अजमेर राजस्थान

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।