ओम जय गणेश

परीत वलिहार विरका वाला
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

कोरस-ओम जय गणेश जय जय गणेश

गोरा मां दा पयारा ए शिव दी अख दा तारा ए

कटदा ए दुख ते कलेश भगतो कटदा ए दुख ते कलेश

ओम जय गणेश़़...........

महिमा एहदी अपरमपार ,सारे जग दा पालनहार

लडुया दा अायो भोग लगाईये ,मुहो मंगीयां मुरादा पाईये

सिर ते मुकट सुनिहरी ए ,हर ईक रमज ही गैहरी ए

भगता नु तारदा हमेश ,भगतो भगता नु तारदा हमेश

ओम जय गणेश़़.............

पहला गोरी लाल मनाईये,शरधा मन चित नाल धयाईये

आस पुरी कर दयुगा ए,खाली झोलीयां भर दयुगा ए

मुसे दी सवारी ए ,लाला इसदी नयारी ए

जिस घर करे परवेश गनपत जिस घर करे परवेश

ओम जय गणेश ...........

सुख पावे जो रजा च रहदां,विरका दा वलिहार है कहदां

आपने जना नु तारे गनपत सबदे काज सवारे गनपत

बिटटु महिमा गाऊदां ए धुप ते जोत जगाऊदां ए

सबनु ही देवे उपदेश भगतो सब नु ही देवे उपदेश

ओम जय गणेश............

लेखक-परीत वलिहार विरका वाला

सिगंर- विपन शरमा बिटटु

कैसट-चुनीयां लालो लाल

मोबाईल-098154 02742

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।