जय काली जय काली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय हो कालका माई तेरी जय हो कालका माई,

भक्तों की रक्षा करने को पावन रूप हो आई,

जय हो कालका माई तेरी.....

देवन करे पुकार मात ने खंडा था लहराया,

चुन-चुन कर दोस्तों को मारा कोई बच ना पाया,

भक्तों पर कृपा होती है तेरी हर पल माई,

जय हो कालका माई तेरी जय हो कालका माई,

जय काली जय काली जय काली.....

काल भी तुमसे कपे मैया तुम ही हो बलशाली,

देवी देवता तेरे दर पर बनके खड़े सवाली,

सबकी चिंता दूर करें तेरा नाम बड़ा सुखदाई,

जय हो कालका माई तेरी जय हो कालका माई,

जय काली जय काली जय काली.....

दुष्टों का है काल कालिका भक्तों की रखवाली,

इसके दर से कभी भी कोई गया ना मुड़कर खाली,

मेरी बारी क्यों जगदंबे तूने देर लगाई,

जय हो कालका माई तेरी जय हो कालका माई,

जय काली जय काली जय काली जय काली.....

आज तेरा जगराता दाती सबको दरस दिखा दे,

कब से खड़े हैं दर पर तेरे दिल की प्यास बुझा दे,

लकी चंचल की भी दर पर हो जाए सुनवाई,

जय हो कालका माई तेरी जय हो कालका माई,

जय काली जय काली जय काली जय काली जय काली जय काली जय काली.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।