ढफ बाजे ढोल शहनाई रे

सर्व मोहन (टीनू सिंह)
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( भादो महीना कृष्ण पक्ष की,

तिथि अष्टम है आई,

रोहिणी नक्षत्र में प्रगटे है हरि,

कृष्ण चंद्र यदुराई,

मथुरा में जो चाँद है निकला,

आज गोकुल दिया दिखाई,

मधुप हरि सब नाचे गावे,

जनम अष्टमी आई। )

ढफ बाजे ढोल शहनाई रे ढफ बाजे,

प्रगटे है कृष्ण कन्हाई रे ढफ बाजे.......

नन्द भवन नन्द नंदन आयो,

सगल सुमंगल आनंद छायो,

हो महकी महकी चले पुरवाई रे ढफ बाजे......

ब्रज वासी मिल ख़ुशी मनावे,

मंगल गीत बधाईयां गावे,

हो नन्द यशोदा बधाई लुटाई रे ढफ बाजे.....

जो आवे सोई पल ना जुलावे,

मधुप हरि मंद मंद मुस्कावे,

हरि दर्श परम सुखदाई रे ढफ बाजे,

ढफ बाजे ढोल शहनाई रे ढफ बाजे.........

(सर्वाधिकार लेखक आधीन सुरक्षित। भजन में अदला बदली या शब्दों से छेड़-छाड़ करना सख्त वर्जित है)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।