पिता घर जाने की आज्ञा दो स्वामी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हट कर बैठी पार्वती रानी,

पिता घर जाने की आज्ञा दो स्वामी....

हमारे पिता ने यज्ञ रचा है,

शब्द एवं को न्योता दिया है,

उसी में जाने की आज्ञा दो स्वामी,

पिता घर जाने की आज्ञा दो स्वामी....

शिव जी ने हट किया गौरा ना मानी,

कर्मों के लेख किसी ने ना जानी,

सोलह श्रृंगार कर चली गौरा रानी,

पिता घर जाने की आज्ञा दो स्वामी....

पिता भवन जब पहुंची भवानी,

सब सखियां हस बोली ना भवानी,

माता भी उनसे बोली न चाली,

पिता घर जाने की आज्ञा दो स्वामी....

यह देख पीछे पछताए गोरा रानी,

हमने पति की आज्ञा न मानी,

यह देख अग्नि में कूदी भवानी,

पिता घर जाने की आज्ञा दो स्वामी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।