भोले की नगरी में मेरा दिल दीवाना हो गया

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले की नगरी में मेरा दिल दीवाना हो गया...

एक तो ब्रह्मांड सिर पर दूसरे गंगा साजे,

तीसरा माथे पर चंदा दिल दीवाना हो गया,

भोले की नगरी में मेरा दिल दीवाना हो गया...

एक तो तेरे कान बिच्छू दुजे माला नागों की,

तीसरा डमरू बजाना दिल दीवाना हो गया,

भोले की नगरी में मेरा दिल दीवाना हो गया...

एक तो अंगों पे भभूति तन बाघमबर सजा हुआ,

तीसरा घुंगरू बजाना दिल दीवाना हो गया,

भोले की नगरी में मेरा दिल दीवाना हो गया...

एक तो तेरे संग गौरा गोद में गणपत सजा,

तीसरा नंदी की सवारी दिल दीवाना हो गया,

भोले की नगरी में मेरा दिल दीवाना हो गया...

एक तो तेरा भोग धतूरा दूसरा भंगिया घुटी,

तिसरा नशे में झूमना दिल दीवाना हो गया,

भोले की नगरी में मेरा दिल दीवाना हो गया...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।