गौरा रानी हसकर बोली

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गौरा रानी हसकर बोली अपनी मां के कान में,

मेरो ब्याह करा दे मैया भोले जी के साथ में....

ब्रह्मलोक मत बयहियो री मैया ब्रह्मलोक नहीं जाऊंगी,

ब्रह्मलोक मे ब्रह्माणी रहती ब्रह्मा जी के साथ में,

मेरो ब्याह करा दे मैया भोले जी के साथ में....

बैकुंठ में मत ब्याहीयो री मैया बैकुंठ मैं नहीं जाऊंगी,

बैकुंठ में लक्ष्मी जी रहती विष्णु जी के साथ में,

मेरो ब्याह करा दे मैया भोले जी के साथ में....

अवधपुरी मत ब्याहीयो री मैया अवधपुरी नहीं जाऊंगी,

अवधपुरी सीता जी रहती रामा जी के साथ में,

मेरो ब्याह करा दे मैया भोले जी के साथ में....

वृंदावन मत ब्याहीयो री मैया वृंदावन नहीं जाऊंगी,

वृंदावन में राधा रहती कान्हा जी के साथ में,

मेरो ब्याह करा दे मैया भोले जी के साथ में....

कैलाश पर्वत ब्याहीयो री मैया हस हस के चली जाऊंगी,

भोले जी के साथ मे सारा जीवन मैं बिताऊंगी,

मेरो ब्याह करा दे मैया भोले जी के साथ में....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।