मेरे सर पर चुनरी ज्ञान की

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मेरे सर पर चुनरी ज्ञान की,

चाहे दिन ओढ़ु या रात मैं सतगुरु की लाडली......

बाबा बागो बागो मैं फिरी,

मुझे कहीं ना मिले भगवान मैं सतगुरु की लाडली,

बेटी बागो फिरे से ना मिले तेरे हृदय में भगवान,

मैं सतगुरु की लाडली.....

बाबा तालो तालों मैं फिरी,

मुझे कहीं ना मिले भगवान मैं सतगुरु की लाडली,

बेटी तालों फिरे से ना मिले तेरे हृदय में भगवान,

मैं सतगुरु की लाडली....

बाबा महलों महलों मैं फिरी,

मुझे कहीं ना मिले भगवान मैं सतगुरु की लाडली,

बेटी महलों फिरे से ना मिले तेरे ह्रदय में भगवान,

मैं सतगुरु की लाडली.....

बाबा मंदिर मंदिर मैं फिरी,

बाबा सत्संग सत्संग मैं फिरी,

मुझे कहीं ना मिले भगवान मैं सतगुरु की लाडली,

बेटी मंदिर घूमे से ना मिले तेरे हृदय में भगवान,

मैं सतगुरु की लाडली....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।