मेरा बांका बजावे ढोल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

( वृन्दावन दा बांके बिहारी, लीला दा अवतार,

कदी लीलारी, कदी ए माली, कदी बन्यो मनिहार,

इक दिन देख पंजाबी भंगड़ा, पावन लग्गा बोली,

लैके ढोल मधुप ढोली तो, अज्ज बांका बन गया ढोली। )

( बांके बिहारी बन गया ढोली, ते भांत भांत दी पावे बोली,

ते लगदा सोहना जाट पंजाबी, हाय मैं बलिहारी जावा,

मेरा बांका बजावे ढोल ते मैं भंगड़ा पावा।। )

बांके बांके बिहारी बन गया ढोली, भांत भांत दी पावे बोली,

लगदा सोहना जट पंजाबी, मैं बलिहारी जावा,

मेरा बांका बजावे ढोल ते मैं भंगड़ा पावा।।

कन विच मुंदरा गल विच माला,

कनी मुंदरा गल विच माला, चादर कुड़ता बड़ा निराला,

तुरले वाली पगड़ी सोवे, शोभा कह ना पावा,

मेरा बांका बजावे ढोल ते मैं भंगड़ा पावा।।

ए मस्त नशीला शैल शभीला, पैरी घुंघरू पटका पीला,

जी करे राधा बन एहनु, गल विच बावां पावा,

मेरा बांका बजावे ढोल ते मैं भंगड़ा पावा।।

ताल इलाही ढोल दा वज्जे, जेहड़ा वेखे ओहियो नच्चे,

संत भगत जन हो गए इकठे, नचन फड़ फड़ बावां,

मेरा बांका बजावे ढोल ते मैं भंगड़ा पावा।।

कहे मधुप अज्ज शैल बिहारी, लीला किती बड़ी ही न्यारी,

इंझ लग्गे ज्यो आयी बैसाखी, नच नच ख़ुशी मनावा,

मेरा बांका बजावे ढोल ते मैं भंगड़ा पावा.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।