शिव महाँकाल जय जय शम्भो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शिव महाँकाल जय जय शम्भो,

शिव भोलेनाथ जय जय शम्भो,

हे आदिदेव देवो के देव,

हे महादेव जय जय जय जय शम्भो,

शम्भो शम्भो शम्भो शम्भो,

शम्भो शम्भो शम्भो शम्भो....

हे अमरनाथ जय जय शम्भो,

हे सोमनाथ जय जय शम्भो,

शिव शतिनाथ जय जय शम्भो,

शिव गौरीनाथ जय जय शम्भो,

कैलाशपति जय जय शम्भो,

हे उमापति जय जय शम्भो,

डमरू धारी जय जय शम्भो,

हे अविकारी जय जय शम्भो,

शिव अविनाशी घट घट वासी,

हे महादेव जय जय जय जय शम्भो,

शम्भो शम्भो शम्भो शम्भो.....

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||

भीमाशंकर जय जय शम्भो,

ओंकारेश्वर जय जय शम्भो,

केदारेश्वर जय जय शम्भो,

हे त्र्यंबकेश्वर जय जय शम्भो,

हे मम्लेश्वर जय जय शम्भो,

हे घृष्णेश्वर जय जय शम्भो,

हे रामेश्वर जय जय शम्भो,

हे नागेश्वर जय जय शम्भो,

हे वैद्यनाथ हे विश्व नाथ,

हे महाँकाल जय जय जय जय शम्भो....

शिव महाँकाल जय जय शम्भो,

शिव भोलेनाथ जय जय शम्भो,

हे आदिदेव देवो के देव,

हे महादेव जय जय जय जय शम्भो,

शम्भो शम्भो शम्भो शम्भो,

शम्भो शम्भो शम्भो शम्भो.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।