गणराज रंगी नाचतो

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

गणराज रंगि नाचतो नाचतो,

पायि घागर्‍या करिती रुणझुण,

नाद स्वर्गि पोचतो….

कटि पीतांबर कसुन भर्जरी,

बाल गजानन नर्तनास करी,

तुंदिल तनु तरि चपल साजिरी,

लावण्ये साजतो...

नारद तुंबरु करिती गायन,

करी शारदा वीणावादन,

ब्रह्मा धरितो तालहि रंगुन,

मृदंग धिमि वाजतो……

देवसभा घनदाट बैसली,

नृत्यगायने मने हर्षली,

गौरीसंगे स्वये सदाशिव,

शिशुकौतुक पाहतो…

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।