झूलें पार्वती जगदम्बा झुलावें शंकर त्रिपुरारी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

झूलें पार्वती जगदम्बा झुलावें शंकर त्रिपुरारी,

शंकर त्रिपुरारी झुलावें शंकर त्रिपुरारी,

पार्वती बोली शंकर से अर्ज सुनो म्हारी,

सावन की रुत आई सदाशिव छाई घटा प्यारी हो झूलें,

झूलें पार्वती जगदम्बा झुलावें शंकर त्रिपुरारी.....

हाँ गोकुल के में राधा के संग झूलें बनवारी,

तुम तो नाथ कभी ना झूले भोले भंडारी हो झूलें,

झूलें पार्वती जगदम्बा झुलावें शंकर त्रिपुरारी.....

सर्पो की प्रभु डोर बनाई कल्पतरु पे डारी,

उस झूले में झूले भवानी शोभा अति प्यारी हो झूलें,

झूलें पार्वती जगदम्बा झुलावें शंकर त्रिपुरारी.....

सारा मंडल इस छवि पर पल पल बलिहारी,

भक्त कहें प्रभु दर्शन दे दो आस लगी भारी हो झूलें,

झूलें पार्वती जगदम्बा झुलावें शंकर त्रिपुरारी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।