मालपुरा तेरा सच्चा है धाम

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॥ पावन पाठ ॥

मालपूरा तेरा सच्चा है धाम,

सुनके कुशल गुरु तेरा मैं नाम,

दर्शन पाने को आया दर पे तेरे.....

जैतसिरी के प्यारे, अपने भक्तो को परचा दिखाए

भर दिए वो झोली, कभी दर पे तुम्हारे फैलाए

खाली है ये दामन, आज भराने को ॥ १ ॥

सोमवार पुनम, तेरे दर्शन की महिमा है भारी,

दर पे सर झुकाने, आते लाखो ही नर और नारी

मैं भी तेरे चरणों में, पुष्प चढाने को I २ ॥

क्या बताऊँ दादा, तेरे दर्शन का मैं हु दिवाना

आश कर दो पूरी, दर से यूं ही न मुझको लौटाना,

आये है दादा गुरु, आज मनाने को आया दर ॥ ३* ।।

भजन गायक- सिंगर भीखम जैन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।