तेरी रहमतों का दरिया सरेआम चल रहा है - गुरुदेव भजन

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

( जब तक थी, तुमसे दूरी, कीमत न कुछ मेरी थी l

कीमत न, कुछ मेरी थी, कीमत न कुछ मेरी थी l )

हुई तुमसे, जो मोहब्बत ll, मेरा नाम बन रहा है,

तेरी रहमतों, का दरिया, सरेआम चल रहा है l

मुझे भीख, मिल रही है, तेरा काम चल रहा है,,,

तेरी रहमतों, का दरिया, सरेआम चल रहा है ll

मैंने जब भी, यहॉं पुकारा, तूने दे दिया सहारा l

तूने दे दिया, सहारा, तूने दे दिया सहारा l

तेरे नाम, के सहारे ll, मेरा काम चल रहा है,,,

तेरी रहमतों का दरिया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मुझे मद की, नहीं जरूरत, तेरे नाम का नशा है l

तेरे नाम, का नशा है, तेरे नाम का नशा है l

तेरे नाम, की मदिरा ll, हर याम बन रहा है,,,

तेरी रहमतों का दरिया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मुझे इश्क़ है, तुम्हीं से, मैं दीवाना बन गया हूँ l

मैं दीवाना, बन गया हूँ*, मैं दीवाना बन गया हूँ l

मेरे दिल की, धड़कनों में ll, तेरा नाम चल रहा है,,,

तेरी रहमतों का दरिया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।