मैं पागल बृज़ धाम का दास श्यामा श्याम का

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

बौल-: मुकुट सिर मोर का

मैं पागल बृज़ धाम का, दास श्यामा श्याम का,

चरणं सुखदाई, युगल सरकार के,

मैं पागल बृज़ धाम का.....

श्यामा श्याम जहां चरणं धरत है,

देख युगल चरणं मन ना भरत है,

प्रेमी सुखधाम का, दास श्यामा श्याम का,

चरणं सुखदाई, युगल सरकार के,

मैं पागल बृज़ धाम का.....

जिंन चरणंन की पुजा, महादेव करत है,

ब्रम्हां पुजन को ललाईत रहत है,

आनंद रस पान का, दास श्यामा श्याम का,

चरणं सुखदाई, युगल सरकार के,

मैं पागल बृज़ धाम का.....

रसका पान पागल करत है,

इन चरणंन को धसका, मन में धरत है,

स्वामी जू के नाम का, दास श्यामा श्याम का,

चरणं सुखदाई, युगल सरकार के,

मैं पागल बृज़ धाम का.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।