चार दिनों की प्रीत जगत में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चार दिनों की प्रीत जगत में चार दिनों के नाते हैं।

पलकों के पर्दे पडते ही सब नाते मिट जाते हैं।

जिनकी चिन्ता में तू जलता वे ही चिता जलाते हैं।

जिन पर रक्त बहाये जलसम जल में वही बहाते हैं।

घर के स्वामी के जाने पर घर की शुद्धि कराते हैं।

पिंड दान कर प्रेत आत्मा से अपना पिंड छुडाते हैं।

चौथे से चालीसवें दिन तक हर एक रस्म निभाते हैं।

म्रतक के लौटआने का कोई जोखिम नही उठाते हैं।

आदमी के साथ उसका खत्म किस्सा हो गया।

आग ठण्डी हो गई चर्चा भी ठण्डा हो गया।

चलता फिरता था जो कल तक।

बनके वो तस्वीर आज लग गया दीवार पर मजबूर कितना हो गया।

Shaan दुबे

९७५२५४३९६२

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।