भादो की रात काली झुकी रे अंधेरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

भादों की रात काली झुकी रे अंधिरिया भयो अजब कमाल,

जायो देवकी ने लाल देखो जेलन में जेलन में.....

अद्भूद शक्ति पैदा हो गयी जेलेंन के दरवियान हो,

चार भुजा और रूप अनोखा जयति चंद्र समान हो,

हाथ चंद्र और गधा विराजे नैना कमल समान हो,

गल वैजन्ती माला कन्नन मे कुण्डलिया भयो,

भादों की रात काली....

करे स्तुती जेल मे दोनों छायी ख़ुशी आपार हो,

हाथ जोड़ के बोली मैया ऐसो रूप निहार हो,

रूप छिपाये करे शिशुलीला ऐसे करे ऊपार हो,

बालक पन फिर रोये है कन्हैया भयो,

भादों की रात काली....

धयान भयो वासुदेव को जब ही कंस को बालक जानो है,

कंस के हाथ मे दोनों होयेंगे आपनो ये वचन निभानो है,

करो मशवरा फिर दोनों ने गोकुल मे पहुचानो है,

चल वासुदेव लेके डाल को छैया भयो,

भादों की रात काली....

सोए सब संत्री सब जेलन के सो गये पहरेदार हो,

लाला को लेकर के चल दिये सुमर श्री करतार हो,

लाला को लेके चले गोकुल की डगरिया,

भादों की रात काली....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।