मोरपंख माथे पे जड़ा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोरपंख माथे पे जड़ा और होठो पर मुस्कान रे,

रास रचाये बंसी बजाये वो राधा का श्याम रे,

मोरपंख माथे पे जड़ा और होठो पर मुस्कान रे,

रास रचाये बंसी बजाये वो राधा का श्याम रे,

खेल खेल में जीतेगा वो पाप का हर संग्राम रे,

हर दिल हर मुख जाएगा उसका ही अब नाम रे,

हे कृष्णा हे कृष्णा हे कृष्णा,

हे कृष्णा हे कृष्णा कृष्णा बोलो रे.....

गिरधारी मोहन गोपाला कान्हा और घनश्याम रे,

नारायण हरी बोल मुकनदा संग डॉ और बलराम रे,

खेल खेल में जीतेगा वो पाप का हर संग्राम रे,

हर दिल हर मुख जाएगा उसका ही अब नाम रे,

हे कृष्णा हे कृष्णा हे कृष्णा,

हे कृष्णा हे कृष्णा कृष्णा बोलो रे.....

जमुना किनारे कान्हा गैया चरता है,

गोकुल को प्रीती की धुन पे नाचता है,

हे जमुना किनारे कान्हा गैया चरता है,

गोकुल को प्रीती की धुन पे नाचता है,

बंधियो घमंडियो को सबक वो सिखाता है,

पापियो को दानवो को धूल में मिलता है,

चोर है चिट चोर है वो माखन चुराता है,

उंगली पे अपनी गोवर्धन उठता है,

हे कृष्णा हे कृष्णा हे कृष्णा रे,

हे कृष्णा हे कृष्णा कृष्णा बोलो रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।