वृन्दावन बोले मोर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

वृंदावन बोले मोर

============

वृंदावन, बोले मोर, हो जी मोर,

गोकुल में, शोर भयो भारी ll

गोकुल में, शोर भयो भारी ll

वृंदावन,,, जय हो lll बोले मोर,

हो जी मोर,

गोकुल में, शोर भयो भारी ll

उड़-उड़ मोर, कदम्ब पर बैठे l

उड़-उड़ मोर, "कदम्ब पर बैठे" l

और बैठे हैं ll, पँख मरोड़, हो मरोड़,

गोकुल में, शोर भयो भारी,,,

वृंदावन, बोले मोर, ओ जी मोर,,,,,,,,,F

टप टप टप टप, पैज़ गिरत है l

टप टप टप टप, "पैज़ गिरत है" l ( जी )

और बीने ll, नवल किशोर, हो किशोर,

गोकुल में, शोर भयो भारी,,,

वृंदावन, बोले मोर, ओ जी मोर,,,,,,,,,F

इन पैज़न को, मुकुट बनो है l

इन पैज़न को, "मुकुट बनो है" l ( जी )

या हे पहने ll, नंद किशोर, हो किशोर,

गोकुल में, शोर भयो भारी,,,

वृंदावन, बोले मोर, ओ जी मोर,,,,,,,,,F

धन धन है, हे मात यशोद्धा l

धन धन है, "हे मात यशोद्धा" l ( जी )

या ने जाया ll, नंदकिशोर, हो किशोर,

गोकुल में, शोर भयो भारी,,,

वृंदावन, बोले मोर, ओ जी मोर,,,,,,,,,F

धन धन है ये, व्रज की नगरी l

धन धन है ये, "व्रज की नगरी" l ( जी )

यहॉं खेले ll, युगल किशोर, हां किशोर,

गोकुल में, शोर भयो भारी,,,

वृंदावन, बोले मोर, ओ जी मोर,,,,,,,,,F

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।