अवतार लो प्रभु आके धरती पर पाप बढ़त जावे.....

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अवतार लो प्रभु आके धरती पर पाप बढ़त जावे.....

आजकल की बहू बेटियां,

खोले सर को ढके नहीं चुटिया,

अरे अब उल्टा पल्ला डाल के धरती पर लटका जावे,

अवतार लो प्रभु आके धरती पर पाप बढ़त जावे.....

आजकल के बहू और बेटा,

मात पिता को दे दे धक्का,

अरे अब रोज ही पिक्चर जात हैं सौ सौ के टिकट कटावे,

अवतार लो प्रभु आके धरती पर पाप बढ़त जावे.....

जुल मिल पंचम सभा बनाई,

करके चंदा पैसा ऊघाई,

आजकल के सरपंचम के आगे परमेश्वर भी डरपत है,

अवतार लो प्रभु आके धरती पर पाप बढ़त है.....

बहन बहन जी को कोई न पूछे,

साली साली घर में रहते,

नारी पति पर हुकम चलात हैं खुद पलके पे सोवत है,

अवतार लो प्रभु आके धरती पर पाप बढ़त है.....

अपना वचन दिया है सुनाई,

पाप का घड़ा भरा है जाई,

अरे अब सहज ही देओ उतार नहीं तो सिर पर ही फुटत है,

अवतार लो प्रभु आके धरती पर पाप बढ़त है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।