चाकर नही तो दवारपाल रख लो

पारंपरिक
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

दादी थारे मंदीरिया को चाकर रख लो,

चाकर नही तो दवारपाल रख लो,

कभी ना नागा मरू गा रोज काम पे आऊगो

जो देगो बदले में सिर माथे लगाओ,

जो तो सास्तो सोदो है कबूल कर लो,

चाकर नही तो दवारपाल रख लो.....

रोज सवेरे जोत जगाऊ ठाणे भोग लगाऊ,

खूब लगन से सेवा कर सूजी नही चुरू गो,

सेवा करने को एक मौका तो दियो,

चाकर नही तो दवारपाल रख लो.....

दावर पे थारे बेठा रहू चोकसी बिठाउ गो,

और जो आसी बनता थारे दर्शन को ले आऊ गो,

भूल अगर हो जावे तो माफ़ कर दियो,

चाकर नही तो दवारपाल रख लो.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।