तेरी महिमा अपरम्पार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरी महिमा अपरम्पार

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तेरी महिमा, अपरम्पार, हो पार,

वृषभानु दुलारी श्री राधे ll

*हो वृषभानु दुलारी, श्री राधे ll

तुम हो, सच्ची सरकार, सरकार,

वृषभानु दुलारी श्री राधे l

तेरी महिमा, अपरम्पार,,,,,,,,,,,,,

सारे, जग की रखवाली है l

कष्टों को, हरने वाली है ll

तुझे पूजे, यह संसार, संसार,

वृषभानु दुलारी श्री राधे,,,

तेरी महिमा, अपरम्पार,,,,,,,,,,,,,F

दीनन की, सुनने वाली है l

भक्तन की, यह रखवाली है ll

इन चरणों में, सुखधाम, सुखधाम,

वृषभानु दुलारी श्री राधे,,,

तेरी महिमा, अपरम्पार,,,,,,,,,,,,,F

दुनियाँ ने, जब मुझे ठुकराया l

भटका, तब शरण, तेरी आया ll

मेरा कर दो, बेडा पार, हो पार,

वृषभानु दुलारी श्री राधे,,,

तेरी महिमा, अपरम्पार,,,,,,,,,,,,,F

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।