साई मेरा भोला भंडरी है

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॥ पावन पाठ ॥

साई मेरा भोला भंडरी है,

मेरी भी किस्स्मत संवारो साईं नाथ,

तूने सारे जहाँ की संवारी है,

साई मेरा भोला भंडरी है......

तूने तो तारे है पापी हज़ारो,

पापी हज़ारो बाबा पापी हज़ारो,

मुझपे भी नजरे करो साईं नाथ,

मेरे पापों की गठरी ये भारी है ,

साई मेरा भोला भंडरी है......

शाम सवेरे मैं तुझको पुकारूँ,

तुझको पुकारूँ बाबा तुझको पुकारूँ,

सुन लो मेरी भी पुकार साईं नाथ,

मैंने हर सांस तुझपे निसारि है ,

साई मेरा भोला भंडरी है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।