रोए रोए द्रोपत कान्हा को पुकारती

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रोए रोए द्रोपत कान्हा को पुकारती जी,

एजी सभा में आ जाइयो राखी को बोल चुका जाइयो,

आ जइयो मेरे वीर.....

नारी की लज्जा कौन रखें एक पति रखें एक वीर रखें,

पांचो पति तो बैठे गर्दन दाल के जी,

ऐजी सहारो तेरो है दुनिया में कोई ना मेरो है,

वधा जा नेक धीर रोए रोए द्रुपद कान्हा को पुकारती जी......

जब उंगली कटी तुम्हारी थी मैंने बांधी रेशम साड़ी थी,

वचन दिया था तुमने अपनी बहन को जी,

इसका मोल चुकाऊंगा अंबर से चीर बढ़ाऊंगा,

वधा जा नेक धीर रोए रोए द्रुपद कान्हा पुकारती जी......

वह दुष्ट दुशासन आया है मुझे नग्न देखना चाहता है,

केस पकड़ के भैया मुझे लाया है जी,

सब देवर जेठ हमारे हैं ये बेरी बने हमारे हैं,

बढा जा मेरो चीर रोए रोए द्रुपद कान्हा को पुकारती जी.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।