मुझे हरिद्वार को जाना है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

गाड़ी धीरे धीरे हांक मुझे हरिद्वार को जाना है,

मुझे हरिद्वार को जाना है, मुझे हरिद्वार को जाना है,

गाड़ी धीरे धीरे हांक मुझे हरिद्वार को जाना है.....

या गाड़ी में मेरे सास ससुर है,

के उनको गंगा नहाना है, मुझे हरिद्वार में जाना है,

गाड़ी धीरे धीरे हांक मुझे हरिद्वार को जाना है.....

या गाड़ी में मेरे जेठ जेठानी,

के उनको दरस कराना है, मुझे हरिद्वार को जाना है,

गाड़ी धीरे धीरे हांक मुझे हरिद्वार को जाना है.....

या गाड़ी में मेरे देवर दयोरानी,

उनकी झोली भराना है, मुझे मनसा पर जाना है,

गाड़ी धीरे धीरे हांक मुझे हरिद्वार को जाना है.....

या गाड़ी में मेरे ननंद नंदोई,

उनकी अर्जी लगाना है, मुझे चंडी पै जाना है,

गाड़ी धीरे धीरे हांक मुझे हरिद्वार को जाना है.....

या गाड़ी में मेरे आडोसी पड़ोसी,

उन्हें विश्वास दिलाना है, मुझे हरिद्वार को जाना है,

गाड़ी धीरे धीरे हांक मुझे हरिद्वार को जाना है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।