भोले जी तेरा मिलकर बिछड़ना याद आता है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले जी तेरा ना जाने मिलकर बिछड़ना याद आता है....

भोले के माथे पर चंदा जटा में बहती है गंगा,

ना जाने क्यों तेरी गंगा में नहाना याद आता है,

भोले जी तेरा ना जाने मिलकर बिछड़ना याद आता है....

भोले के कान में बिच्छू गले में नाग काला है,

ना जाने क्यों मुझे माला पहनाना याद आता है,

भोले जी तेरा ना जाने मिलकर बिछड़ना याद आता है....

भोले के तन पर बाघमबर हाथ में डमरू बजता है,

ना जाने क्यों तेरा नचना नचाना याद आता है,

भोले जी तेरा ना जाने मिलकर बिछड़ना याद आता है....

भोले के संग में गोरा गोद में गणपत लाला है,

न जाने क्यों तेरी नंदी पर घूमना याद आता है,

भोले जी तेरा ना जाने मिलकर बिछड़ना याद आता है....

तेरा यह रूप न्यारा है देख दिल मेरा मचलता है,

न जाने क्यों तेरा सजना सवरना याद आता है,

भोले जी तेरा ना जाने मिलकर बिछड़ना याद आता है....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।