आजाओ रे मेरे श्याम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ये मेरे दिल की पुकार है और ये पुकार भी एक दरकार है सुन,

लाज बचने वाले मुरली बजने वाले,

आस की है डोर है छुटी,लाज है तेरे हवाले,

बनती सुनले मेरी आ जाओ जग रख वाले,

आ जाओ रे मेरे श्याम.............

जल्दी आओ जल्दी आओ हे घनश्याम,

आ जाओ मेरे श्याम,जल्दी आओ जल्दी आओ,

सबगी हदों को नही जनता है यहाँ कोई मुझको को ना पहचानता है,

बचा ले मेरी लुटती इस अरबु को ना पांचो में योधा कोई ठानता है,

अब वक़्त फैसले का नजदीक आ गया है सबकी आस छोड़ी दिल ने तो ये कहा है,

आ जाओ मेरे श्याम........

जीत के स्वम्बर लाया अर्जुन एक सबा से मुझको

पांचो की रानी बनाया कुन्ती माँ ने मुझको,

फिर भी मेरी लाज बचने वाला नही है कोई,

मैं निर्बल आब लाज दरोप्ती श्याम पुकारू तुझको,

पांचो पांडव निर्बल बेठे देखो अंखिया मिचे,

बेठे है यहाँ ड्रोन भीम भी करके गर्दन निचे,

आँखों में अनसु भर के जप्ती तेरा नाम,

आ जाओ मेरे श्याम........

रह जाये मेरा भरोसा इजत रह जायेगी

ओस गमो नार की इज्जत वापिस नही आयेगी,

पति से ज्यदा भाई पे करती बहिन भरोसा,

ना आया तो बेहन भरोसा कभी न कर पाए गई

धरती एम्बर एक हो गया मेरे लिए मुरारी,

सोनू लाख हाथ उठा के मेने अरज गुजारी,

मेरी इज्जत तेरे हवाले सुनले घनश्याम,

आ जाओ मेरे श्याम........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।