मैंने ढूंढ लिए चारों धाम नहीं मिले राम

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मैंने ढूंढ लिए चारों धाम,

नहीं मिले राम,

यही तो दुःख भरी है……

ढूंढा मैंने नगरी अयोध्या,

जहां राम लिए अवतार,

मिले नहीं राम,

यही तो दुःख भरी है,

मैंने ढूंढ लिए चारों धाम,

नहीं मिले राम,

यही तो दुःख भरी है…..

ढूंढ लिया मैंने जनक भवन में,

जहां राम लिए कन्यादान,

मिले नहीं राम,

यही तो दुःख भरी है,

मैंने ढूंढ लिए चारों धाम,

नहीं मिले राम,

यही तो दुःख भरी है……

ढूंढ लिया मैंने सरयू किनारे,

जहां राम किये स्नान,

मिले नहीं राम,

यही तो दुःख भरी है,

मैंने ढूंढ लिए चारों धाम,

नहीं मिले राम,

यही तो दुःख भरी है.....

ढूंढ लिया मैंने सिता रसोई,

जहां राम किये जल पान,

मिले नहीं राम,

यही तो दुःख भरी है,

मैंने ढूंढ लिए चारों धाम,

नहीं मिले राम,

यही तो दुःख भरी है.....

ढूंढ लिया मैंने तुलसी अंगना,

जहां राम किये पूजा पाठ,

मिले नहीं राम,

यही तो दुःख भरी है,

मैंने ढूंढ लिए चारों धाम,

नहीं मिले राम,

यही तो दुःख भरी है.....

ढूंढ लिया मैंने लंका नगरी,

जहां राम किये संग्राम,

मिले नहीं राम,

यही तो दुःख भरी है,

मैंने ढूंढ लिए चारों धाम,

नहीं मिले राम,

यही तो दुःख भरी है.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।