भर लाई गगरिया राम रस की

पारंपरिक
महादेव भजन राम भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भर लाई गगरिया राम रस की,

राम रस की रे हरि के रस की,

भर लाई गगरिया राम रस की,

राम रस की रे हरि के रस की.....

ब्रह्मा ने पी ली विष्णु ने पी ली,

भोले बाबा ने पी ली लगाय चुस्की,

भर लाई गगरिया राम रस की,

राम रस की रे हरि के रस की....

राम जी ने पी ली लक्ष्मण ने पी ली,

भक्त हनुमत ने पी ली लगाय चुस्की

भर लाई गगरिया राम रस की,

राम रस की रे हरि के रस की.....

साधुओं ने पी ली संतों ने पी ली,

मुनि नारद ने पी ली लगाय चुस्की,

भर लाई गगरिया राम रस की,

राम रस की रे हरि के रस की.....

गोपियों ने पी ली सखियों ने पी ली,

सभी भक्तों ने पी ली लगाय चुस्की,

भर लाई गगरिया राम रस की,

राम रस की रे हरि के रस की.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।