चारों धाम से निराला अवधपुरी धाम

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

चारों धाम से निराला अवधपुरी धाम,

रानी सीता के संग विराजे राजा राम....

सरयू के तट पे तुलसी मिलेगे,

तुलसी सुनाएँगे राम गुण गान,

चारों धाम से निराला अवधपुरी धाम.....

कैसे ह्दय में सिया राम को बसाया,

तुमको बताएँगे वीर हनुमान,

चारों धाम से निराला अवधपुरी धाम......

अयोध्या की गलियों में लक्ष्मण के त्याग है,

शत्रु भरत की है महिमा बखान,

चारों धाम से निराला अवधपुरी धाम.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।