पर्वत पर कुटिया बनाई रे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

पर्वत पर कुटिया बनाई रे भोले बाबा तुमने,

बाबा तुमने भोले बाबा तुमने,

सावन ने कुटिया छाई रे भोले बाबा तुमने.....

आधी कुटिया पर बेला चमेला,

आधी पर भंगिया बूबाई रे भोले बाबा तुमने....

आधी कुटिया पर चंदा और सूरज,

आधी पर गंगा बहाई रे भोले बाबा तुमने....

आधी कुटिया पर बिच्छू ततैया,

आधी पर नाम लहराई रे भोले बाबा तुमने.....

आधी कुटिया मैं नंदी बसाई,

आधी में गोरा बैठाई रे भोले बाबा तुमने….

आधी कुटिया में ऋषि मुनि गण,

आधी में अर्जी लगाई रे भोले बाबा तुमने….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।