बरसाना बरसाना ये है बरसाना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बरसाना बरसाना ये है बरसाना,

बाहर पीकर गिरनें वालो यहां सम्भंल कर आना,

बरसाना बरसाना ये है बरसाना....

अपनें आप सुलझ जायेंगें,

तेरे उलझे धागे राधा रस पियोगे जब,

सोई किस्मत जागे,

बरसाना बरसाना ये है बरसाना,

सारी दुनिया छोड़ दो चाहे, ये दर भुल ना जाना,

बरसाना बरसाना ये है बरसाना....

खुद भी पियो औरों को पिलायो, प्यास बड़ाते जायो,

बरसाने से जब घर जायो, राधा नाम ही गाओ,

जब अपनों से चोट लगे तो,इस दर पे आ जाना,

बरसाना बरसाना ये है बरसाना,

सारी दुनिया छोड़ दो चाहे,ये दर भुल ना जाना,

बरसाना बरसाना ये है बरसाना....

श्यामा श्याम का ये नज़राना, उन प्यासो तक पहुंचाना,

नज़राना नज़राना ये है नज़राना,

महख़ाना महख़ाना ये है महख़ाना,

बरसाना बरसाना ये है बरसाना....

धाम भी है ओर नाम है ये, जी भर के पी लेगें,

आज भजंन का अवसर है अब, जी भरके जी लेगें,

जीवन की अब साझं भई है, ओर ना अब तरसाना,

बरसाना बरसाना ये है बरसाना,

सारी दुनिया छोड़ दो चाहे, ये दर भुल ना जाना,

बरसाना बरसाना ये है बरसाना....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।